**भव्य उद्घाटन 18 अक्टूबर को, सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था**
बाराबंकी। हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर हर साल आयोजित होने वाला देवा मेला इस बार और भी अधिक भव्यता और आकर्षण के साथ मनाया जाएगा। **18 अक्टूबर से 27 अक्टूबर** तक चलने वाले इस मेले में देशभर से लाखों की संख्या में जायरीन और पर्यटक शामिल होंगे। देवा मेला 2024 का उद्घाटन **जिलाधिकारी की धर्मपत्नी** द्वारा किया जाएगा, जबकि समापन समारोह में **पुलिस अधीक्षक की पत्नी** मुख्य अतिथि होंगी। इस वर्ष मेला अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है, जहां परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
### **सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सितारों की रोशनी**
मेले की एक प्रमुख आकर्षण सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हैं, जिसमें इस बार संगीत प्रेमियों के लिए खास तोहफा है। मशहूर गायक **रूप कुमार राठौर** और लोकप्रिय गजल एवं कव्वाली गायक **अल्ताफ राजा** अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लेंगे। संगीत के ये दोनों सितारे मेले के सांस्कृतिक रंग को और भी जीवंत बनाएंगे। देवा मेला हमेशा से ही सांस्कृतिक और धार्मिक दोनों ही रूपों में महत्वपूर्ण रहा है, और इस साल इन दो महान कलाकारों की उपस्थिति इसे एक नया आयाम देगी।
### **सदियों पुरानी परंपराएं, खेलकूद और मुशायरा**
देवा मेला की सबसे खास बात उसकी **सदियों पुरानी परंपराएं** हैं, जो इसे एक विशिष्ट स्थान पर खड़ा करती हैं। मेला सचिव **अरुण कुमार सिंह** ने बताया कि इस बार मेले में होने वाला **मुशायरा अपने 100वें साल** में प्रवेश कर रहा है। मुशायरे की यह परंपरा हाजी वारिस अली शाह के विचारों और सूफी संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक प्रमुख माध्यम है, जहां उर्दू शायरी के माध्यम से प्रेम, सौहार्द और मानवता का संदेश दिया जाता है।
इसके अलावा, देवा मेला की **हॉकी प्रतियोगिता अपने 97वें वर्ष** में है, जबकि **दंगल प्रतियोगिता 99 साल** से जारी है। इन प्रतियोगिताओं का ऐतिहासिक महत्व है, और इस बार इनके आयोजन को और भी भव्य रूप दिया जाएगा। विशेष रूप से दंगल और हॉकी प्रतियोगिताओं में देशभर के जाने-माने खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, जो दर्शकों के बीच रोमांच पैदा करेगा।
### **त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी**
मेले में इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। **अपर पुलिस अधीक्षक चिरंजीवी नाथ सिंहा** ने बताया कि पूरे मेले को त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा। मेला क्षेत्र को **सेक्टर और जोन** में विभाजित किया गया है, जहां प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी एक वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी की होगी। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से मेला क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, और निगरानी के लिए **ड्रोन कैमरों** का भी उपयोग किया जाएगा।
सुरक्षा के लिए दो **कंट्रोल रूम** बनाए गए हैं—एक मुख्यालय में और दूसरा मेला परिसर में। पुलिस बल के साथ-साथ **महिला पुलिसकर्मियों** की भी विशेष तैनाती होगी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके। इसके अलावा, **यातायात** व्यवस्था को भी सुचारू बनाने के लिए अलग से प्रबंध किए गए हैं, जिसमें पार्किंग स्थल और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था शामिल है।
### **जायरीनों और पर्यटकों के लिए विशेष सुविधाएं**
जायरीनों और पर्यटकों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मेले के दौरान **पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और साफ-सफाई** के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेला स्थल पर **चिकित्सा कैंप** लगाए जाएंगे, जिसमें **एम्बुलेंस और मेडिकल टीम** हर समय तैनात रहेगी। किसी भी आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए देवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को विशेष रूप से तैयार किया गया है।
इसके अलावा, इस बार **पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए** समापन समारोह के समय की जाने वाली आतिशबाजी **इको-फ्रेंडली** होगी, जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। इस कदम के तहत आतिशबाजी से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करने का प्रयास किया गया है।
### **देवा मेला: सूफी परंपराओं और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक**
देवा मेला न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह **राष्ट्रीय एकता** और **सांस्कृतिक समन्वय** का प्रतीक भी है। यहाँ सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की शिक्षाओं और उनके द्वारा दिए गए प्रेम और भाईचारे के संदेश को मानने वाले लाखों लोग एकत्र होते हैं। यह मेला वर्षों से **सांप्रदायिक सौहार्द** और **धर्मनिरपेक्षता** का प्रतीक बना हुआ है, जहाँ विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग एक साथ मिलकर इस महोत्सव को मनाते हैं।
**समापन**
देवा मेला-2024 एक बार फिर से **धार्मिक आस्था**, **सांस्कृतिक धरोहर**, और **सामाजिक एकता** की मिसाल पेश करने जा रहा है। यहाँ खेलकूद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, और सूफी संतों की महिमा के बीच एक अद्वितीय अनुभव की प्राप्ति होगी। मेले में इस बार की जाने वाली सुरक्षा और व्यवस्था के कदमों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर जायरीन और पर्यटक बिना किसी समस्या के इस अद्वितीय महोत्सव का हिस्सा बन सके।


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