फ्रेंड्स समय न्यूज़ के संवाददाता प्रीति मोटवानी की एक विशेष रिपोर्ट:
हमारे संवाददाता ने पाया है कि क्षेत्र में कई ऐसे डॉक्टर हैं जो बिना किसी मान्यता प्राप्त डिग्री या रजिस्ट्रेशन के चिकित्सा का अभ्यास कर रहे हैं। इनमें से एक ऐसे डॉक्टर से जब पूछा गया कि वे बिना डिग्री के कैसे प्रैक्टिस कर रहे हैं तो उन्होंने दावा किया कि वे सीएससी और पीएससी को पैसे देते हैं।
यह डॉक्टर एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और एंटीबायोटिक दवाएं सहित सभी तरह की दवाएं मरीजों को दे रहे हैं। जब उनसे स्पैस्मोप्रोक्सिवॉन कैप्सूल की डोज के बारे में पूछा गया तो वे बीडी और टीडीएस जैसे चिकित्सा संक्षेपों के अर्थ भी नहीं बता पाए। उन्होंने दावा किया कि वे स्पैस्मोप्रोक्सिवॉन केवल तभी देते हैं जब मरीज को बहुत अधिक दर्द होता है और यह कि इस दवा का सीधा असर किडनी पर होता है।
यह डॉक्टर रोजाना 50 से 60 मरीजों का इलाज कर रहे हैं। जबकि सरकार केवल एमबीबीएस, बीयूएमएस, बीईएमएस और बीएएमएस डिग्री को मान्यता देती है, फिर भी ये डॉक्टर बिना किसी रोकटोक के अपना काम जारी रखे हुए हैं।
समाचार में उठ रहे मुख्य बिंदु:
* बिना डिग्री वाले डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा का अभ्यास
* एलोपैथिक, आयुर्वेदिक और एंटीबायोटिक दवाओं का बिना किसी प्रतिबंध के उपयोग
* चिकित्सा संक्षेपों के बारे में बेसिक जानकारी का अभाव
* सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का उल्लंघन
* बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज
सरकारी नियम:
सरकार का स्पष्ट आदेश है कि कोई भी व्यक्ति बिना मान्यता प्राप्त डिग्री और रजिस्ट्रेशन के चिकित्सा का अभ्यास नहीं कर सकता।
सवाल:
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ऐसे डॉक्टर बिना किसी कार्रवाई के कैसे प्रैक्टिस कर पा रहे हैं? क्या स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कोई कार्रवाई करेगा?
यह खबर उन सभी लोगों के लिए चिंता का विषय है जो ऐसे डॉक्टरों से इलाज करवा रहे हैं।




No comments:
Post a Comment