जिला सरकारी अस्पताल बाराबंकी में दिल के मरीजों को हो रही है दिक्कत एको मशीन रूम में लगा है ताला,
बाराबंकी जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में डॉक्टर नदारद, ईको मशीन पर ताला, मरीजों को लखनऊ भेजने के दौरान मौत का सिलसिला जारी*
बाराबंकी: जिला अस्पताल बाराबंकी में हृदय रोग विभाग की स्थिति दयनीय हो गई है। पिछले कई महीनों से अस्पताल में इस विभाग के लिए नियुक्त डॉक्टर गायब हैं, जिससे हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि अस्पताल में मौजूद ईको मशीन तक बंद पड़ी है और रूम पर ताला लगा हुआ है। गंभीर हृदय रोगियों को लखनऊ के मेडिकल कॉलेज के लारी अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, लेकिन कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही से मरीजों और उनके परिजनों में गहरी नाराजगी है, लेकिन उच्च अधिकारी, खासकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), इस पर मौन साधे हुए हैं।
*मरीजों को रेफर करना बन रहा है जानलेवा*
हाल ही में एक गंभीर हृदय रोगी को बाराबंकी जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। परिवार वालों ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर थी और उसे तुरंत ईको टेस्ट की जरूरत थी। लेकिन जब वे ईको मशीन रूम पहुंचे, तो वहां ताला लगा हुआ मिला। अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें बताया कि हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर भी नहीं हैं, और उन्हें मरीज को लखनऊ रेफर करना पड़ेगा। मरीज को लखनऊ भेजने के दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
*परिवार वालों का बयान*
मृतक मरीज के बेटे ने दुखी मन से कहा, "हमारे पिता को इलाज की सख्त जरूरत थी, लेकिन यहां कोई डॉक्टर नहीं था। हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। ईको मशीन का रूम बंद पड़ा था और हमें लखनऊ जाने को कहा गया। परंतु रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। अगर यहां इलाज की सुविधा होती, तो शायद हमारे पिता आज हमारे साथ होते।"
एक अन्य मरीज की बेटी ने कहा, "हम अपने पिता के लिए हर संभव इलाज करवाना चाहते थे, लेकिन बाराबंकी जिला अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति और मशीनों के ताले ने हमें लाचार बना दिया। हमारे पास लखनऊ जाने का विकल्प नहीं था, पर मजबूर होकर उन्हें ले जाना पड़ा। ये अस्पताल क्या सिर्फ रेफर करने के लिए बना है?"
*स्थानीय लोगों की नाराजगी और सवाल*
जिला अस्पताल में डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोगों में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, "हृदय रोगियों के लिए जिला अस्पताल में कोई इलाज नहीं है। हर मरीज को लखनऊ भेजा जाता है। यह अस्पताल शहर का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है, लेकिन यहां जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। प्रशासन को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये मरीजों की जान का सवाल है।"
*CMO की चुप्पी पर सवाल*
अस्पताल में डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी के बावजूद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अधिकारियों की चुप्पी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता का मानना है कि अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण ही यहां की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है। लोग मांग कर रहे हैं कि अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए और बंद पड़ी मशीनों को जल्द से जल्द चालू किया जाए, ताकि हृदय रोगियों को रेफर करने की बजाय यहीं इलाज मिल सके।
*क्या सरकार लेगी संज्ञान?*
अस्पताल की इस स्थिति को लेकर जनता अब उम्मीद कर रही है कि प्रशासन और सरकार इस पर ध्यान देंगे। जिला अस्पताल जैसे बड़े अस्पताल में हृदय रोगियों के इलाज के लिए डॉक्टरों और जरूरी उपकरणों का उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस पर त्वरित कार्यवाही करे और सुनिश्चित करे कि मरीजों को रेफर करने की बजाय यहीं इलाज मिले, ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
*संवाददाता: अरशद जमाल, बाराबंकी*



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