Monday, 28 July 2025
आज दिनांक 28.07.2025 को समाजवादी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता व अधिवक्ता मुस्तहसन जुबेर के आवास पर आगामी विधान सभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए एक मिटिंग हुई जिसमें समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व गणमान्य लोग उपस्थित हुए तथा सबने अपने-अपने विचार व्यक्त किये। जिसमें से मुख्य रुप से मुस्तहसन जुबेर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पार्टी के रीढ़ कहे जाने वाले कद्दवर नेता आजम खान आज-कल सीतापुर जेल में है जिन्हें राजनैतिक विरोधियों द्वारा षडयंत्र का शिकार बनाया गया है और षडयंत्रकारी चक्रव्यूह में पूरे परिवार को झूठे मुकदमें में फंसाया गया है आजम खान के साथ में पार्टी के बड़े चेहरे जो समय-समय पर रामपुर में पूर्व काबिना मंत्री की चौखट पर नतमस्तक हुआ करते थे और उनके एहसानो की दुहाई दिया करते थे उन सभी ने अपनी निगाहें आजम खां की ओर से फेर ली है पार्टी की बेदारी का यह हाल है कि अब तो पार्टी के बैनर व पोस्टर से भी आजम खां की तस्वीरे हटने लगी है। यह वहीं आजम खां है जिन्होने अपने सियासी सफर में अपनी राजनीतिक सूझ-बूझ और रैलियों में अपनी पार्टी के लिये खून-पसीना एक करके समाजवादी पार्टी खड़ी की थी जिनकी राजनीतिक सूझ-बूझ के चलते प्रदेश में कई बार समाजवादी पार्टी की सरकार बनी थी आज वही सब लोग आजम खां के साथ खामोश रहकर उनके एहसानों का बदला उतार रहे है यह वही आजम खां है जब समाजवादी पार्टी के मुखिया के परिवार में गद्दी को लेकर खींचतान चल रही थी तो आजम खां ने ही एक मात्र सूत्रधार की भूमिका अदा की थी। विपरीत परिस्थितियों में भी आजम खां कभी विधायक, कभी लोकसभा, कभी राज्यसभा सीटो को समाजवादी पार्टी की झोली में भरा था अपने लगभग 50 साल के राजनैतिक जीवन में पार्टी की बुनियाद में मजबूत सुतून की तरह हमेशा खड़े रहे तो क्या पार्टी को आजम खां के साथ खड़े नहीं? होना चाहिये था? क्या दूसरे नेताओं के लिये सड़क पर उतरकर आन्दोलन करने चाहिये थे और आजम खां के लिए नहीं जब आजम खां पर झूठे मुकदमें लगाये जा रहे थे तो पार्टी सड़को पर क्यों नहीं उतरी इसके अलावा बहुत से बड़े सवाल न कि प्रदेश बल्कि देश में भी इस देश की दूसरी बड़ी आबादी के ज़हन में कहीं न कहीं समाजवादी पार्टी के लिए गम्भीर सवाल पैदा कर रहे है। जिन सवालों का जवाब भविष्य में समाजवादी पार्टी पर बुरा असर डाल सकता है जो कि पार्टी के लिये कहीं न कहीं हानिकारक साबित हो सकता है। क्योंकि पार्टी ने भले ही कह दिया हो कि पूरी पार्टी श्री आजम खां व उनके परिवार के साथ खड़ी है मगर खड़ी है तो अब तक दिखी क्यों नहीं? आजम खां पार्टी के लिये सदैव खरा होना साबित हुये है और पार्टी को भी यह जानना होगा कि आजम खां सिर्फ एक नाम ही नहीं एक विचारधारा का नाम है जो कहीं न कहीं पूरे देश व प्रदेश में खुद को साबित जरुर करेंगी। समाजवादी पार्टी के लिये यह एक गम्भीर चिन्ता का विषय हो सकता है। आजम खां दबे-कुचले और कुंठित समाज के लिये सदैव खड़े रहे और उनके लिए हक की आवाज उठाई। एक ऐसा शिक्षाविद जिसने रामपुर के लोगो को छूरी-चाकू के बजाय कलम थमाई जिसने न सिर्फ मो० अली जौहर यूनिवर्सिटी खोली बल्कि अंग्रेजी माध्यम के रामपुर पब्लिक स्कूल भी खोले जहां पर फीस न्यूनतम रखी और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले रिक्शा वाले, ठेले वाले, खोमचे वाले परिवार के बच्चो को शिक्षा प्रदान करने के लिये प्रति माह लगभग 20 रुपये फीस रखी। कलम का यह सिपाही जिसकी आयु लगभग 75 वर्ष है वह गर्मी के उच्च तापमान को या ठिठुरती हुई ठंडक या उमस भरी गर्मी में आज सीतापुर जेल में पार्टी के प्रति अपनी कुर्बानियों की सजा काट रहा है और फिर पार्टी कहती है कि उनको तभी न्याय मिल सकता है जब सरकार बदले या कोर्ट फैसला दे या फिर भगवान। इतना कह देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती उन युवाओं के भविष्य का क्या जो पार्टी के लिये अपनी जवानी कुर्बान करने को तैयार है। क्योंकि जब इतने बड़े नेता के साथ हाथ खड़े कर लिये गये हो तो पार्टी में युवा के मुस्तकबिल का क्या भरोसा समाजवादी पार्टी के लिये यह न सिर्फ एक गम्भीर मसला बल्कि बहुत बड़ी चिन्ता का विषय है। समाजवादी पार्टी के इस मिटिंग में तमाम लोग उपस्थित रहे।
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